भारत–ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ECTA) के चार वर्ष पूर्ण 

पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  •  भारत–ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (Ind-Aus ECTA) के हस्ताक्षर के चार वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।

परिचय

  •  यह समझौता 2 अप्रैल 2022 को हस्ताक्षरित किया गया था और इसने दोनों देशों के बीच व्यापार प्रवाह को बढ़ाने, औद्योगिक संबंधों को सुदृढ़ करने तथा व्यवसायों, उद्यमियों और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • मुख्य प्रावधान : भारत ने अपनी 70.3% टैरिफ लाइनों पर वरीयतापूर्ण बाजार पहुँच प्रदान की, जो कुल व्यापार मूल्य के 90.6% को कवर करती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने अपनी 100% टैरिफ लाइनों पर वरीयतापूर्ण बाजार पहुँच प्रदान की, जो भारत से होने वाले आयात के 100% के अनुरूप है।
    •  इनमें से 98.3% टैरिफ लाइनों को कार्यान्वयन के साथ ही शुल्क-मुक्त कर दिया गया, जबकि शेष 1.7% को पाँच वर्षों में चरणबद्ध रूप से समाप्त किया जा रहा है।
    • 1 जनवरी 2026 से भारत के सभी निर्यात ऑस्ट्रेलिया में शून्य-शुल्क बाजार पहुँच के पात्र हो गए हैं।
  • समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार : ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात दोगुने से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2020–21 में 4 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024–25 में 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।
    • वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान कुल द्विपक्षीय व्यापार 24.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया को भारत के निर्यात में विगत वर्ष की तुलना में 8% की वृद्धि दर्ज की गई।
    •  वित्त वर्ष 2025–26 में भारत का ऑस्ट्रेलिया के साथ कुल व्यापार 19.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंधों का संक्षिप्त विवरण 

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2009 में ‘रणनीतिक साझेदारी’ से अपने संबंधों को 2020 में ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किया।
  • द्विपक्षीय तंत्र : इनमें 2+2 रक्षा एवं विदेश मंत्रियों का संवाद, संयुक्त व्यापार और वाणिज्य मंत्रिस्तरीय आयोग, रक्षा नीति वार्ता, ऑस्ट्रेलिया-भारत शिक्षा परिषद, रक्षा सेवाओं की स्टाफ वार्ता, ऊर्जा संवाद तथा विभिन्न मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह (JWGs) शामिल हैं।
  • द्विपक्षीय व्यापार : वित्त वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 24.1 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें भारत का निर्यात 8.58 अरब डॉलर तथा आयात 15.52 अरब डॉलर रहा।
    •  भारत, ऑस्ट्रेलिया का 8वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, भारत का 14वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
    •  व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (CECA) को और सुदृढ़ करने हेतु वार्ताएँ जारी हैं।
  • रक्षा एवं सुरक्षा :‘क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (QSD)’ एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं।
    •  वर्ष 2021 में दोनों देशों की नौसेनाओं ने ‘भारत–ऑस्ट्रेलिया नौसेना संबंध हेतु संयुक्त मार्गदर्शन’ दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए।
    • अभ्यास : वर्ष 2020 में ऑस्ट्रेलिया ने मालाबार नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया और इस प्रकार भारत, अमेरिका तथा जापान के साथ जुड़ा।
      • AUSINDEX: यह रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी और भारतीय नौसेना के बीच आयोजित नौसैनिक अभ्यास है।
      • पिच ब्लैक अभ्यास: भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2018 में डार्विन में आयोजित इस अभ्यास में भाग लिया।
    • 2020 के समझौते: म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट तथा रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन व्यवस्था, जो जटिल सैन्य सहयोग तथा क्षेत्रीय आपदाओं के प्रति सामूहिक तत्परता को सुदृढ़ करते हैं।

  • महत्वपूर्ण क्षेत्र : 2022 में ऑस्ट्रेलिया-भारत क्रिटिकल मिनरल्स निवेश साझेदारी पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अंतर्गत 2023 के अंत में ऑस्ट्रेलिया-भारत क्रिटिकल मिनरल्स अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई।
    •  यह केंद्र सतत खनन एवं प्रसंस्करण में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य करता है, जिसके लिए 5 मिलियन डॉलर का सरकारी वित्तपोषण अनुमोदित किया गया है।
  • प्रवासन एवं गतिशीलता : वर्ष 2023 में ऑस्ट्रेलिया और भारत ने माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप अरेंजमेंट (MMPA) में प्रवेश किया, जो दोनों देशों के बीच प्रवासन एवं गतिशीलता को समर्थन प्रदान करता है तथा अवैध एवं अनियमित प्रवासन से संबंधित मुद्दों का समाधान करता है।
  • 2025 का आर्थिक रोडमैप : ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2025 में यह रोडमैप लॉन्च किया, जिसमें रक्षा, खेल, संस्कृति, अंतरिक्ष एवं प्रौद्योगिकी सहित लगभग 50 लक्षित अवसरों की पहचान की गई।
  • स्वच्छ ऊर्जा : ऑस्ट्रेलिया की नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता का उपयोग भारत के स्थिरता लक्ष्यों को समर्थन देने हेतु किया जा रहा है, जिसमें 2025 में भारत–ऑस्ट्रेलिया रूफटॉप सोलर प्रशिक्षण अकादमी की स्थापना शामिल है, जो 2,000 महिलाओं और युवाओं को सौर तकनीशियन के रूप में प्रशिक्षित करेगी।
  • शिक्षा एवं कौशल : शैक्षणिक साझेदारियों और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ कर ज्ञान आदान-प्रदान एवं कार्यबल विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • कृषि व्यवसाय : भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने और खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कृषि व्यापार का विस्तार किया जा रहा है।
  • पर्यटन : सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने तथा वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाकर लोगों के बीच संपर्क को सुदृढ़ किया जा रहा है।

भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया का महत्व

  • इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक साझेदार: ऑस्ट्रेलिया एक मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो भारत के समुद्री एवं क्षेत्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप है।
  • महत्वपूर्ण खनिज एवं ऊर्जा का प्रमुख स्रोत:  ऑस्ट्रेलिया लिथियम, कोबाल्ट, दुर्लभ पृथ्वी तत्व, कोयला तथा एलएनजी की आपूर्ति करता है, जिससे भारत की ऊर्जा और औद्योगिक सुरक्षा सुदृढ़ होती है।
  • व्यापार एवं आर्थिक साझेदार:  भारत–ऑस्ट्रेलिया ECTA (2022) के अंतर्गत टैरिफ में कमी के साथ द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार हो रहा है तथा व्यापक CECA की दिशा में वार्ताएँ जारी हैं।
  • शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र: ऑस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों के लिए एक प्रमुख गंतव्य है, जहाँ STEM, नवाचार तथा पारस्परिक योग्यता मान्यता में सहयोग बढ़ रहा है।
  • भूराजनीतिक अभिसरण : QUAD, हिंद महासागर रिम संघ (IORA), पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) जैसे बहुपक्षीय मंचों में घनिष्ठ सहयोग भारत को अपने साझेदारी विकल्पों का विविधीकरण करने और क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में सहायता करता है।

चिंता के क्षेत्र 

  • व्यापार असंतुलन एवं सीमित विविधीकरण:  भारत के निर्यात, ऑस्ट्रेलिया के संसाधन-प्रधान निर्यात की तुलना में अभी भी सीमित हैं, जिसके कारण निरंतर व्यापार असंतुलन बना हुआ है तथा व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (CECA) की दिशा में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
  • भारतीय प्रवासी एवं सुरक्षा संबंधी चिंताएँ : भारतीय छात्रों से संबंधित समय-समय पर होने वाली घटनाएँ तथा सामुदायिक तनाव, उनकी सुरक्षा और सामाजिक समावेशन को लेकर चिंताएँ उत्पन्न करते हैं।
  • वीज़ा, गतिशीलता एवं कौशल मान्यता संबंधी समस्याएँ: प्रगति के बावजूद कौशल की पारस्परिक मान्यता, कार्य वीज़ा व्यवस्था तथा भारतीय छात्रों के लिए अध्ययन उपरांत अवसरों के संदर्भ में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
  • कृषि बाज़ार पहुँच संबंधी समस्याएँ:  ऑस्ट्रेलिया के कठोर स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) मानकों के कारण भारत को अपने कृषि उत्पादों के निर्यात में विभिन्न बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
  • रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग में धीमी प्रगति:  यद्यपि संयुक्त सैन्य अभ्यास सुदृढ़ हैं, तथापि रक्षा विनिर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्र में सहयोग अभी भी अपेक्षाकृत अविकसित है।

आगे की राह 

  • रणनीतिक एवं रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना : समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, संयुक्त रक्षा उत्पादन में सहयोग का विस्तार करना तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में QUAD-प्रेरित पहलों को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
  • CECA को शीघ्र अंतिम रूप देना एवं व्यापार का विविधीकरण : व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को शीघ्र निष्पादित करते हुए वस्तुओं, सेवाओं, महत्वपूर्ण खनिजों तथा डिजिटल व्यापार के क्षेत्रों में विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • महत्वपूर्ण खनिज एवं स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को सुदृढ़ करना : लिथियम तथा दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के लिए दीर्घकालिक आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण करते हुए हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा जलवायु सहनशीलता से संबंधित परियोजनाओं में सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

स्रोत: PIB

 

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